शहीद अग्निवीर रोहित रावत का बलिदान और विकास के दावों के बीच पहाड़ की हकीकत

टिहरी सत्य | विशेष लेख

देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक के मेंडू सिंदेवाल गांव निवासी 21 वर्षीय अग्निवीर रोहित रावत को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके बलिदान ने पूरे उत्तराखंड को गर्व और शोक, दोनों भावनाओं से भर दिया। लेकिन इस बलिदान के बीच एक ऐसा सवाल भी खड़ा हुआ है, जो विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को उजागर करता है।

शहीद के गांव तक पहुंचना आज भी चुनौती

एक ओर सरकारें गांव-गांव तक विकास पहुंचाने और सड़कों के जाल बिछाने के दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर शहीद अग्निवीर रोहित रावत के गांव तक पहुंचने वाली सड़क की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। गांव के लोगों को आज भी खराब और जर्जर मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

क्या शहीदों के गांवों को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए?

यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं है, बल्कि उन गांवों की उपेक्षा का प्रश्न है, जहां से देश की रक्षा के लिए वीर जवान निकलते हैं। पहाड़ के युवा सेना में भर्ती होकर देश सेवा का गौरव बढ़ाते हैं, लेकिन उनके गांव आज भी बेहतर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

विकास के दावे बनाम जमीनी सच्चाई

बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब किसी शहीद के गांव तक पहुंचने में ही कठिनाई हो, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास का वास्तविक लाभ किस तक पहुंच रहा है? क्या शहीदों के गांवों को विशेष प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए?

पहाड़ के वीरों का सम्मान केवल शब्दों से नहीं

शहीद अग्निवीर रोहित रावत का बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा। लेकिन उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल श्रद्धासुमन अर्पित करने से नहीं, बल्कि उनके गांव और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने से होगी। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही शहीदों के सम्मान का वास्तविक स्वरूप होगा।

बड़ा सवाल

आखिर कब तक पहाड़ के वीर देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करते रहेंगे और उनके गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे?

देश के लिए शहीद होने वाले हर जवान के गांव तक विकास की रोशनी पहुंचना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व भी है। शहीद अग्निवीर रोहित रावत का बलिदान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी कब समाप्त होगी?

— टीम टिहरी सत्य

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