देहरादून, 14 अगस्त। उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल एवं अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के व्यापक जनहित और क्षेत्रीय विकास को देखते हुए उत्तरकाशी– कमद–आयराखाल–बुडाकेदार–चमियाला–घनसाली–तिलवाड़ा मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए जाने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में धनसाली विधानसभा क्षेत्र के विधायक शक्तिलाल शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर आवश्यक पहल किए जाने का अनुरोध किया है।
विधायक शक्तिलाल शाह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि उक्त मार्ग चारधाम परियोजना के अंतर्गत ऑलवेदर रोड से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए जाने से उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल सहित पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा तथा पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 9 फरवरी 2023 को प्रेषित पत्र तथा 19 जनवरी 2023 को गठित समिति के संदर्भ में उक्त मार्ग को ऑलवेदर रोड से जोड़ने एवं राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। विधायक ने मुख्यमंत्री से इस मामले में अपने स्तर से आवश्यक पहल करते हुए भारत सरकार से मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कराने का अनुरोध किया।
विधायक के पत्र के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजकर इस मांग पर आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक एवं सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि उत्तरकाशी– कमद–आयराखाल–बुडाकेदार–चमियाला–घनसाली–तिलवाड़ा मार्ग कई महत्वपूर्ण पर्वतीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है। यह मार्ग चारधाम यात्रा, पर्यटन, स्थानीय आवागमन तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नया बाईपास रूट: इस मार्ग के खुलने से यात्री उत्तरकाशी से सीधे धौंतरी, कमद, अयारखाल, बूढ़ाकेदार और घनसाली होते हुए तिलवाड़ा पहुँच सकते हैं. यहाँ से वे सीधे केदारनाथ के बेस पॉइंट (सोनप्रयाग/गौरीकुंड) के लिए निकल जाते हैं.2. समय और ईंधन की बचत (Time & Fuel Efficiency)पहाड़ी रास्तों पर 55-60 किलोमीटर की कमी होने का सीधा मतलब है कि यात्रियों के 3 से 4 घंटे बचते हैं.इसके साथ ही गाड़ियों का ईंधन बचता है और थकाऊ पहाड़ी सफर छोटा हो जाता है.3. नए धार्मिक स्थल का जुड़ाव (Bonus Pilgrimage)इस मार्ग से जाने का सबसे बड़ा आध्यात्मिक लाभ यह है कि श्रद्धालुओं को मुख्य मार्ग पर ही बूढ़ा केदारनाथ मंदिर (जिन्हें पांचवां धाम भी माना जाता है) के दर्शन करने का सौभाग्य मिल जाता है.
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में बेहतर एवं सुरक्षित सड़क संपर्क अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में विकसित होने पर इस मार्ग के निर्माण, चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार से अपेक्षित संसाधन एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री से जनहित एवं क्षेत्र के व्यापक विकास को दृष्टिगत रखते हुए उक्त मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
इस पहल से क्षेत्रवासियों को सड़क संपर्क बेहतर होने, यात्रा समय कम होने तथा पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। 

