पुराने डंपिंग जोनों को लीज पर देने की संभावनाओं पर हो विचार, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ बढ़ सकता है सरकारी राजस्व
टिहरी गढ़वाल। टिहरी जिले में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के विभिन्न पुराने डंपिंग जोनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में पहल किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। लंबे समय से अनुपयोगी पड़े इन स्थलों का उचित रखरखाव और विकास नहीं होने के कारण कई स्थानों पर झाड़ियां उग आई हैं। यदि इन स्थानों की उपयोगिता का आकलन कर नियमानुसार विकास की योजना बनाई जाए, तो ये सरकारी राजस्व बढ़ाने के साथ ही आम जनता के लिए सुविधाएं जुटाने का माध्यम बन सकते हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान विभिन्न स्थानों पर डंपिंग जोन बनाए जाते हैं। समय के साथ इनका उपयोग कम होने पर कई स्थान खाली पड़े रह जाते हैं। ऐसे में संबंधित विभागों को इन स्थलों की वर्तमान स्थिति का सर्वेक्षण कर यह निर्धारित करना चाहिए कि किन स्थानों का उपयोग अन्य जनोपयोगी कार्यों के लिए किया जा सकता है।
लीज पर देने से खुल सकते हैं विकास के नए रास्ते
यदि संबंधित भूमि बीआरओ अथवा किसी अन्य सरकारी विभाग के स्वामित्व में है, तो उसके स्वामित्व, तकनीकी स्थिति और नियमानुसार उपयोग की संभावनाओं की जांच की जानी चाहिए। जिन स्थलों को अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल करना संभव हो, उन्हें निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लीज पर उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

ऐसी भूमि का उपयोग पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, पार्किंग स्थल, यात्री सुविधा केंद्र और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए दुकानों जैसी परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक स्थान पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति वहां की भौगोलिक स्थिति, सड़क सुरक्षा तथा संबंधित विभागों की स्वीकृति पर निर्भर करेगी।
चारधाम यात्रा के दौरान उपयोगी साबित हो सकते हैं ये स्थल
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के दौरान सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। यात्रियों को पार्किंग, शौचालय, पेयजल, विश्राम स्थल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। टिहरी जिले के प्रमुख मार्गों के आसपास उपयुक्त स्थानों पर यदि पुराने डंपिंग जोनों को विकसित किया जाए, तो यात्रियों को राहत मिल सकती है।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन, स्वच्छता केंद्र और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के केंद्र विकसित करने से पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। ऐसी परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की संभावनाएं भी रहेंगी।
संबंधित विभागों के समन्वय से तैयार हो कार्ययोजना
पुराने डंपिंग जोनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए बीआरओ, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। इसमें भूमि की उपलब्धता, वर्तमान उपयोग, सड़क निर्माण की भविष्य की जरूरतों, पर्यावरणीय प्रभाव और सुरक्षा मानकों का आकलन किया जाना जरूरी होगा।
यदि किसी स्थल को लीज पर देना नियमानुसार संभव हो, तो उसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर उपयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे अनुपयोगी पड़ी भूमि का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ सरकार को नियमित राजस्व प्राप्त होने की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
विकास के साथ पर्यावरण और सड़क सुरक्षा का भी ध्यान जरूरी
पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि से पहले भू-स्खलन की आशंका, ढलानों की स्थिरता, जल निकासी और पर्यावरणीय प्रभावों का परीक्षण जरूरी है। पुराने डंपिंग जोनों का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए कि सड़क यातायात प्रभावित न हो और भविष्य में सड़क निर्माण अथवा रखरखाव के कार्यों में बाधा उत्पन्न न हो।
समय की जरूरत है कि टिहरी जिले में ऐसे अनुपयोगी स्थलों की पहचान कर उनकी संभावनाओं का आकलन किया जाए। उचित योजना, विभागीय अनुमति और जनहित को प्राथमिकता देकर इन स्थानों को उपयोगी परिसंपत्तियों में बदला जा सकता है। इससे पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सरकारी राजस्व में संभावित वृद्धि का रास्ता खुल सकता है।

