उत्तराखंड में स्वैच्छिक चकबंदी योजना 2026: किसानों के लिए नई उम्मीद, खेती होगी आसान

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी हुई कृषि भूमि को एकीकृत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू करने का निर्णय लिया है। इस नीति का उद्देश्य किसानों की सहमति से चकबंदी कर कृषि को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाना है।

क्या है स्वैच्छिक चकबंदी योजना?

स्वैच्छिक चकबंदी ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसान अपनी इच्छा और आपसी सहमति से बिखरी हुई कृषि भूमि को एक स्थान पर समेकित कराते हैं। इससे खेती करना आसान होता है, लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

  • बिखरी हुई कृषि भूमि का समेकन करना।
  • खेती की लागत को कम करना।
  • सिंचाई और कृषि आधारभूत सुविधाओं का विकास करना।
  • आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोकना और रोजगार बढ़ाना।

किन क्षेत्रों में लागू होगी योजना?

यह नीति मुख्य रूप से उत्तराखंड के 11 पर्वतीय जिलों में लागू की जाएगी। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 275 गांवों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पात्रता और आवश्यक शर्तें

  • चकबंदी क्षेत्र का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर होना चाहिए।
  • यदि क्षेत्रफल कम है, तो कम से कम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति आवश्यक होगी।
  • विवाद रहित गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • पूरी प्रक्रिया किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित होगी।

किसानों को मिलने वाले लाभ

स्वैच्छिक चकबंदी के बाद किसानों को अनेक सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं—

  • सामूहिक बाड़बंदी की सुविधा।
  • कृषि एवं बागवानी योजनाओं में प्राथमिकता।
  • सिंचाई और संपर्क मार्गों का बेहतर विकास।
  • सरकारी योजनाओं और अनुदानों का लाभ लेने में आसानी।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी), उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय अथवा संबंधित राजस्व अधिकारियों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ भूमि विवरण, खतौनी और सहमति पत्र जमा करना होगा।

निष्कर्ष

उत्तराखंड की स्वैच्छिक चकबंदी योजना-2026 पर्वतीय कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। यदि किसान सामूहिक रूप से इस पहल में भाग लेते हैं, तो खेती अधिक लाभकारी बनेगी, उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यह योजना पलायन रोकने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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