गाजियाबाद | 3 अक्टूबर 2026 | टिहरी सत्य
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद से जुड़े वर्ष 2018 के एक पुराने मामले में गाजियाबाद की विशेष MP-MLA अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत ने उनकी संपत्ति के संबंध में कुर्की की कार्रवाई के आदेश भी दिए हैं। यह कार्रवाई अदालत में उनकी गैरहाजिरी से जुड़ी बताई जा रही है।
2018 के मामले से जुड़ा है विवाद
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मामला वर्ष 2018 में साहिबाबाद क्षेत्र के एक शादी समारोह से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि समारोह के दौरान विवाद के बाद उसके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। मामले में चंद्रशेखर आजाद समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
कोर्ट में पेशी को लेकर हुई कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद की गैरहाजिरी को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अदालत में कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया और संपत्ति कुर्क करने से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने के आदेश दिए।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि चंद्रशेखर आजाद मई 2025 में इसी मामले में अदालत के समक्ष पेश हुए थे और उस समय उनके खिलाफ जारी वारंट को वापस लेने की मांग की थी।
क्या है गैर-जमानती वारंट?
गैर-जमानती वारंट अदालत द्वारा जारी किया जाने वाला एक गंभीर न्यायिक आदेश है। इसका अर्थ यह नहीं होता कि संबंधित व्यक्ति को मामले में दोषी घोषित कर दिया गया है। मुकदमे का अंतिम परिणाम अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होता है।
आगे क्या होगा?
अब मामले में अदालत की आगामी कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। गैर-जमानती वारंट और संपत्ति कुर्की संबंधी आदेश के बाद चंद्रशेखर आजाद की ओर से अदालत में क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
टिहरी सत्य इस मामले में अदालत के आधिकारिक आदेश और संबंधित पक्षों के आगामी बयानों के आधार पर अपडेट प्रकाशित करेगा।