टिहरी बांध प्रभावित 98 गांवों में नक्शा स्वीकृति को लेकर उठी आवाज, अक्षत पवन बिजलवान ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
टिहरी गढ़वाल।
टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र के 98 गांवों में भवन निर्माण एवं अन्य निर्माण कार्यों के लिए नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को लेकर अब जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की चिंताएं सामने आने लगी हैं। इस मुद्दे को लेकर भाजपा के जिला संयोजक **अक्षत पवन बिजलवान** ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री **पुष्कर सिंह धामी** को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने और जनहित में उचित निर्णय लेने की मांग की है।
अक्षत पवन बिजलवान ने अपने पत्र में कहा है कि टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले **98 गांवों को प्राधिकरण द्वारा चिह्नित किया गया है**, जिसके बाद इन क्षेत्रों में भवन निर्माण सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों के सामने नई परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इन गांवों के अधिकांश लोग ग्रामीण परिवेश से जुड़े हुए हैं और वर्षों से अपनी आवश्यकताओं एवं पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार भवन निर्माण करते आए हैं। ऐसे में अचानक नक्शा स्वीकृति सहित अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं को अनिवार्य किए जाने से आम ग्रामीणों को आर्थिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अक्षत पवन बिजलवान ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि **टिहरी बांध प्रभावित 98 गांवों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नक्शा स्वीकृति संबंधी व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।** उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे विकास और नियोजन की प्रक्रिया भी आगे बढ़े तथा आम जनता को अनावश्यक परेशानियों और अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना भी न करना पड़े।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है, ताकि टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समयबद्ध और जनहितकारी समाधान किया जा सके।
अक्षत पवन बिजलवान ने कहा कि टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की समस्याएं पहले से ही विशेष प्रकृति की रही हैं। ऐसे में 98 गांवों में निर्माण कार्यों के लिए नक्शा पास कराने की व्यवस्था लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों, ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति और क्षेत्र की भौगोलिक आवश्यकताओं का गंभीरता से अध्ययन किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस जनहित से जुड़े विषय का संज्ञान लेते हुए टिहरी गढ़वाल के प्रभावित ग्रामीणों को राहत प्रदान करने के लिए उचित निर्णय लेंगे।

