खनन निदेशक राजपाल लेघा का बड़ा एक्शन: धर्मकांटा, CCTV और RFID स्कैनर से लैस होगा खनन तंत्र

खनन निदेशक राजपाल लेघा का बड़ा एक्शन: धर्मकांटा, CCTV और RFID स्कैनर से लैस होगा खनन तंत्र

MDTSS से जुड़ेंगे खनन पट्टे, स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट; वाहनों का सही वजन और पूरा विवरण होगा डिजिटल रिकॉर्ड, 15 सितंबर तक इंटीग्रेशन का अल्टीमेटम—1 अक्टूबर से नई व्यवस्था में ही चलेगा ई-रवन्ना

देहरादून। उत्तराखण्ड में अवैध खनन, खनिज की ओवरलोडिंग और परिवहन में होने वाली गड़बड़ियों पर अब डिजिटल शिकंजा और मजबूत होने जा रहा है। खनन निदेशक राजपाल लेघा ने प्रदेश के खनन तंत्र को तकनीक की निगरानी में लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए खनन पट्टों, स्टोन क्रशरों और स्क्रीनिंग प्लांटों में कम्प्यूटरीकृत धर्मकांटा, CCTV कैमरा और RFID रीडर/स्कैनर को Mining Digital Transformation & Surveillance System यानी MDTSS से जोड़ने की समयसीमा तय कर दी है।

नई व्यवस्था में केवल धर्मकांटा ही नहीं, बल्कि CCTV कैमरे और RFID रीडर/स्कैनर भी एक ही डिजिटल सिस्टम से इंटीग्रेट होंगे। खनन पट्टों के साथ स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों में लगे RFID रीडर/स्कैनर को भी MDTSS से API के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य खनिज लेकर निकलने वाले वाहन की आवाजाही से लेकर उसके वजन और विवरण तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उस खेल पर पड़ सकता है, जिसमें ई-रवन्ने में दर्ज वजन और मौके पर वाहन में लदे खनिज की मात्रा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। MDTSS इंटीग्रेशन के बाद खनिज परिवहन करने वाले वाहनों का सही वजन डेटा और वाहन का विवरण सिस्टम में प्रदर्शित होगा, जिससे विभाग के पास निगरानी के लिए मजबूत डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

खनन निदेशक राजपाल लेघा की ओर से जारी सूचना में सभी खनन पट्टाधारकों तथा स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट स्वामियों को 15 सितंबर 2026 तक अपने धर्मकांटे, CCTV कैमरे और RFID रीडर/स्कैनर को MDTSS से इंटीग्रेट कराने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग ने समयसीमा भी साफ कर दी है—1 अक्टूबर 2026 के बाद केवल API इंटीग्रेटेड वे-ब्रिज, CCTV कैमरे और RFID रीडर/स्कैनर से युक्त खनन पट्टों, स्टोन क्रशरों और स्क्रीनिंग प्लांटों से ही ई-रवन्ना पोर्टल संचालित होगा।

यानी खनन कारोबार में अब केवल कागजी हिसाब नहीं, बल्कि धर्मकांटे का वजन, कैमरे की निगरानी और RFID की डिजिटल पहचान—तीनों का रिकॉर्ड सिस्टम की नजर में होगा। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि यह डिजिटल शिकंजा जमीन पर अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल को कितनी मजबूती से रोक पाता है।

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