Tehri Satya News | उत्तराखंड
उत्तराखंड में सरकारी विभागों से मिलने वाली कई नागरिक सेवाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित है। उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम, 2011 का उद्देश्य नागरिकों को अधिसूचित सरकारी सेवाएं तय समय में उपलब्ध कराना और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
अगर किसी नागरिक ने किसी ऐसी सेवा के लिए आवेदन किया है जो सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित है और निर्धारित समय-सीमा में सेवा उपलब्ध नहीं होती है, तो वह निर्धारित अपील व्यवस्था का उपयोग कर सकता है।
उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम क्या है?
उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम, 2011 के तहत सरकार अलग-अलग विभागों की नागरिक सेवाओं को अधिसूचित करती है। प्रत्येक सेवा के लिए सामान्यतः निम्न जानकारी निर्धारित की जाती है—
- सेवा का नाम
- पदनामित/पदाभिहित अधिकारी
- सेवा उपलब्ध कराने की समय-सीमा
- प्रथम अपीलीय अधिकारी
- द्वितीय अपीलीय अधिकारी
राजस्व परिषद उत्तराखंड की वेबसाइट पर भी सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित सेवाओं, समय-सीमा तथा प्रथम एवं द्वितीय अपीलीय प्राधिकारियों की सूची प्रकाशित की गई है।
प्रमुख सेवाओं की समय-सीमा
नीचे कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं की समय-सीमा दी जा रही है। ध्यान रखें कि विभाग और सेवा के अनुसार समय-सीमा अलग-अलग हो सकती है।
| क्र. | सेवा | निर्धारित समय-सीमा |
|---|---|---|
| 1 | जाति प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 2 | स्थायी निवास प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 3 | पर्वतीय निवास प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 4 | आय प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 5 | अनुसूचित जाति/जनजाति प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 6 | OBC गैर-क्रीमीलेयर प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 7 | उत्तरजीवी/पारिवारिक सदस्यता प्रमाण-पत्र | 15 कार्य दिवस |
| 8 | राजस्व अभिलेखों में विरासत दर्ज करना | 7 दिन |
| 9 | दिव्यांग व्यक्ति को पहचान पत्र/बस पास | 7 दिन |
| 10 | बस पास जारी करना | 7 दिन |
| 11 | दैवीय आपदा आर्थिक सहायता | 7 दिन |
| 12 | मुख्यमंत्री राहत कोष से प्राप्त धनराशि का वितरण | 5 दिन |
| 13 | आंगनबाड़ी में बच्चों का पंजीकरण | 15 दिन |
| 14 | सोसायटी/फर्म/चिट पंजीकरण | 30 दिन |
| 15 | नया पानी/सीवर कनेक्शन | 15 से 30 दिन |
उपरोक्त सूची में विभागवार अधिसूचनाओं में उपलब्ध समय-सीमाओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है। अलग-अलग सेवा के लिए लागू नवीनतम विभागीय अधिसूचना को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
राजस्व विभाग की सेवाओं की समय-सीमा
राजस्व विभाग के मामले में समय-सीमा को लेकर विशेष रूप से सरकारी अधिसूचना उपलब्ध है।
20 मई 2022 की संशोधित अधिसूचना में राजस्व, भूलेख और संबंधित सेवाओं के लिए सेवा उपलब्ध कराने की समय-सीमा निर्धारित की गई थी।
1. जाति प्रमाण-पत्र
जाति प्रमाण-पत्र के मामले में अधिसूचना में अलग-अलग स्तर के अधिकारियों के लिए चरणबद्ध समय दिया गया है और कुल निर्धारित समय-सीमा 15 कार्य दिवस है।
इसमें राजस्व उप निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक/कानूनगो और तहसीलदार स्तर की प्रक्रिया शामिल है।
कुल समय-सीमा: 15 कार्य दिवस
2. स्थायी निवास प्रमाण-पत्र
स्थायी निवास तथा पर्वतीय निवास प्रमाण-पत्र के लिए भी चरणबद्ध प्रक्रिया निर्धारित है।
कुल समय-सीमा: 15 कार्य दिवस
3. आय प्रमाण-पत्र
आय प्रमाण-पत्र के लिए भी अधिसूचना में चरणबद्ध अधिकारीवार समय दिया गया है।
कुल समय-सीमा: 15 कार्य दिवस
सरकारी अधिसूचना में इन सेवाओं के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी और द्वितीय अपीलीय अधिकारी का भी उल्लेख किया गया है।
सोसायटी रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा कितनी है?
यह विषय उत्तराखंड के सामाजिक संगठनों, प्रेस क्लबों, समितियों और अन्य संस्थाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
उपलब्ध सेवा-समय संबंधी विवरण में सोसायटी/फर्म/चिट पंजीकरण के लिए 30 दिन की समय-सीमा बताई गई है।
इसका मतलब यह है कि यदि संबंधित आवेदन अधिसूचित सेवा के दायरे में आता है, तो आवेदन के निस्तारण के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन किया जाना चाहिए।
यदि आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित रहता है तो आवेदक को संबंधित अधिकारी से स्थिति पूछने के साथ-साथ लागू होने वाली सेवा का अधिकार अपील व्यवस्था का उपयोग करना चाहिए।
पानी और सीवर कनेक्शन
नए पानी या सीवर कनेक्शन जैसी नागरिक सेवाओं के लिए उपलब्ध विवरण में 15 से 30 दिन की समय-सीमा का उल्लेख है।
सेवा की प्रकृति और संबंधित निकाय के अनुसार वास्तविक समय-सीमा अलग हो सकती है।
दैवीय आपदा आर्थिक सहायता
आपदा प्रभावित नागरिकों के लिए उपलब्ध सेवाओं में दैवीय आपदा आर्थिक सहायता के लिए 7 दिन की समय-सीमा का उल्लेख मिलता है।
आपदा राहत से संबंधित मामलों में आवश्यक दस्तावेज और पात्रता भी महत्वपूर्ण होती है।
मुख्यमंत्री राहत कोष
उपलब्ध सेवा विवरण के अनुसार मुख्यमंत्री राहत कोष से प्राप्त धनराशि के वितरण के लिए 5 दिन की समय-सीमा बताई गई है।
दिव्यांग व्यक्तियों से संबंधित सेवाएं
दिव्यांग व्यक्ति को पहचान पत्र/बस पास जारी करने जैसी सेवाओं के लिए उपलब्ध सूची में 7 दिन की समय-सीमा दी गई है।
इसी प्रकार बस पास जारी करने के लिए भी 7 दिन का उल्लेख किया गया है।
आंगनबाड़ी में बच्चों का पंजीकरण
आंगनबाड़ी में बच्चों के पंजीकरण के लिए उपलब्ध सेवा सूची में 15 दिन की समय-सीमा का उल्लेख है।
समय-सीमा समाप्त होने के बाद क्या करें?
अगर किसी नागरिक ने सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत आने वाली सेवा के लिए आवेदन किया है और निर्धारित समय में सेवा नहीं मिली है, तो केवल कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है।
आवेदक को:
1. आवेदन की रसीद सुरक्षित रखें।
2. आवेदन संख्या और आवेदन की तारीख नोट करें।
3. संबंधित सेवा की अधिसूचित समय-सीमा देखें।
4. पदनामित अधिकारी से सेवा की स्थिति पूछें।
5. समय-सीमा समाप्त होने पर प्रथम अपील दाखिल करें।
6. आवश्यकता होने पर आगे की अपील/पुनरीक्षण की कार्रवाई करें।
प्रथम और द्वितीय अपील क्यों महत्वपूर्ण है?
सेवा का अधिकार व्यवस्था में संबंधित सेवा के लिए केवल समय-सीमा ही नहीं बल्कि अपीलीय अधिकारी भी निर्धारित किए जाते हैं।
उदाहरण के लिए 2022 की राजस्व विभाग की अधिसूचना में जाति, निवास और आय प्रमाण-पत्र के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी तथा द्वितीय अपीलीय अधिकारी का उल्लेख किया गया है।
इसलिए यदि अधिकारी निर्धारित समय में सेवा नहीं देता है तो आवेदक के पास आगे कार्रवाई करने का रास्ता रहता है।
क्या हर सरकारी काम सेवा का अधिकार अधिनियम में आता है?
नहीं।
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।
हर सरकारी आवेदन अपने-आप सेवा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नहीं आ जाता। संबंधित सेवा का अधिसूचित होना जरूरी है।
इसलिए किसी भी मामले में यह जांचना जरूरी है कि:
- संबंधित सेवा अधिसूचित है या नहीं?
- वर्तमान समय-सीमा क्या है?
- कौन पदनामित अधिकारी है?
- प्रथम अपीलीय अधिकारी कौन है?
- द्वितीय अपीलीय अधिकारी कौन है?
पुरानी सूची या समाचार रिपोर्ट के बजाय संबंधित विभाग की नवीनतम अधिसूचना को प्राथमिक आधार बनाया जाना चाहिए।
उत्तराखंड के नागरिकों के लिए क्यों जरूरी है यह कानून?
सरकारी कार्यालय में आवेदन करने के बाद यदि फाइल लंबे समय तक लंबित रहती है तो आम नागरिक को यह पता होना चाहिए कि उसके पास क्या अधिकार हैं।
सेवा का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य है—
समयबद्ध सेवा + प्रशासनिक जवाबदेही + अपील का अधिकार
यानी नागरिक को केवल आवेदन करने का अधिकार नहीं बल्कि अधिसूचित सेवा को निर्धारित समय-सीमा में प्राप्त करने की व्यवस्था दी गई है।
खास बात: आपके आवेदन की तारीख सबसे महत्वपूर्ण
यदि आपने किसी सेवा के लिए आवेदन किया है तो सबसे पहले आवेदन की तारीख देखें।
उदाहरण के लिए यदि किसी सेवा की समय-सीमा 15 कार्य दिवस है और आवेदन के बाद यह अवधि पूरी हो चुकी है, तो आवेदक को संबंधित अधिसूचना के अनुसार आगे की अपील प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।
इसी प्रकार यदि सोसायटी/फर्म/चिट पंजीकरण के लिए लागू समय-सीमा 30 दिन है और मामला उससे काफी अधिक समय से लंबित है, तो आवेदक को अपने मामले में लागू अधिसूचना और अपीलीय व्यवस्था के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम, 2011 नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण अधिकार आधारित व्यवस्था है। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों की अधिसूचित सेवाओं के लिए समय-सीमा तय की गई है।
कई महत्वपूर्ण सेवाओं में 7 दिन, 15 कार्य दिवस, 30 दिन तथा 15 से 30 दिन जैसी समय-सीमाएं निर्धारित हैं। हालांकि किसी विशेष मामले में लागू समय-सीमा जानने के लिए संबंधित विभाग की नवीनतम अधिसूचना देखना जरूरी है।
राजस्व परिषद उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट पर सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित सेवाओं, समय-सीमा और अपीलीय अधिकारियों का विवरण उपलब्ध है।
Tehri Satya की अपील:
अगर आपका कोई सरकारी आवेदन निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित है, तो आवेदन संख्या, आवेदन की तारीख और संबंधित विभाग की जानकारी सुरक्षित रखें। अपने अधिकारों की जानकारी लेकर नियमानुसार अपील करें।
स्रोत: उत्तराखंड शासन की सेवा का अधिकार अधिसूचनाएं, राजस्व परिषद उत्तराखंड तथा संबंधित विभागों की प्रकाशित सेवा-सूचियां।
महत्वपूर्ण नोट
समय-सीमा विभाग, सेवा और लागू नवीनतम अधिसूचना के अनुसार बदल सकती है। इसलिए किसी मामले में कानूनी/प्रशासनिक कार्रवाई करने से पहले संबंधित विभाग की वर्तमान अधिसूचना अवश्य देखें।

